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रचित हॉस्पिटल मामले में अपडेट: सात दिन में जांच रिपोर्ट, रजिस्ट्रेशन से लेकर कूटरचित हस्ताक्षर तक उठे सवाल

सिद्धार्थनगर। रचित हॉस्पिटल के रजिस्ट्रेशन और महिला की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच को लेकर नया अपडेट दिया है। सीएमओ डॉ. संजय कुमार दोहरे ने बताया कि पहले गठित पांच सदस्यीय टीम किसी कारणवश जांच नहीं कर पाई। इसके बाद शनिवार को दोबारा जांच टीम गठित की गई है।

सीएमओ के अनुसार, नई जांच टीम में शेषमणि, बीएन चतुर्वेदी और आरजी सिंह को शामिल किया गया है। टीम को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना रजिस्ट्रेशन पर सवाल

मामले में रचित हॉस्पिटल के रजिस्ट्रेशन को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। नोडल अधिकारी नैदानिक स्थापना एवं हॉस्पिटल रजिस्ट्रेशन डॉ. मानवेंद्र पाल का आरोप है कि उनकी जानकारी और हस्ताक्षर के बिना अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया।

ऐसे में जांच कमेटी के सामने यह अहम सवाल होगा कि नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना रजिस्ट्रेशन किस प्रक्रिया के तहत हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है? यदि जांच में प्रक्रिया का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी, यह भी रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।

क्या रचित हॉस्पिटल पर दर्ज होगा मुकदमा?

महिला की मौत और अस्पताल में इलाज से जुड़े पूरे मामले में अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जांच के बाद रचित हॉस्पिटल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा? स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

परिजनों को पैसे के कथित प्रलोभन की बात

उधर, मामले में मृतका के परिजनों को कथित तौर पर पैसों का प्रलोभन दिए जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा कूटरचित हस्ताक्षर किए जाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच टीम इन बिंदुओं की भी पड़ताल करती है या नहीं, यह रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।

सात दिन की जांच के बाद खुलेगा राज

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की नई जांच टीम के सामने अस्पताल के रजिस्ट्रेशन, महिला की मौत, नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना रजिस्ट्रेशन, कथित कूटरचित हस्ताक्षर और परिजनों को कथित प्रलोभन दिए जाने जैसे आरोपों की जांच अहम होगी।

अब बड़ा सवाल यही है कि सात दिन बाद आने वाली जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और रचित हॉस्पिटल के साथ-साथ कथित तौर पर नियमों को दरकिनार कर रजिस्ट्रेशन कराने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।

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