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तीन चोरी की तहरीर, फिर भी मुकदमा दर्ज नहीं? मोहाना पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

सिद्धार्थनगर। मोहाना थाना क्षेत्र में चोरी की तीन अलग-अलग घटनाओं को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने चोरी की घटनाओं की शिकायत पुलिस से की, लेकिन इसके बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर तहरीर मिलने के बाद भी पुलिस ने इन मामलों में एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की।

 

पहला मामला अबूबकर से जुड़ा है। अबूबकर ने 3 जुलाई 2026 को मोहाना थाने में चोरी की तहरीर दी थी। तहरीर पर थानाध्यक्ष की ओर से उपनिरीक्षक जगत नारायण को जांच कर उचित कार्रवाई के लिए इंडोर्स किया गया। हालांकि, सवाल यह है कि तहरीर दिए जाने के बाद अब तक मामले में मुकदमा दर्ज हुआ या नहीं और जांच के नाम पर कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची?

दूसरा मामला वीरेंद्र नाथ यादव की बाइक चोरी का है। उनकी बाइक संख्या UP 55 Z 2414 बताई गई है। वीरेंद्र नाथ यादव बाजार में सब्जी लेने आए थे। इसी दौरान उनकी बाइक चोरी हो गई। पीड़ित ने घटना की जानकारी डायल 112 को भी दी थी और इसका उल्लेख अपनी तहरीर में किया है। इसके बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने की स्थिति में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

तीसरी घटना सुरेश के घर चोरी की है। सुरेश ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि परिवार के लोग घर के बरामदे में सो रहे थे। इसी दौरान चोर घर में घुसे और दो संदूक उठाकर ले गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस को तहरीर दी, लेकिन इस मामले में भी मुकदमा दर्ज हुआ या नहीं, इसे लेकर सवाल बना हुआ है।

पुलिस से सीधे सवाल !

– क्या तीनों पीड़ितों ने पुलिस को लिखित तहरीर दी थी?

– अबूबकर की 3 जुलाई की तहरीर पर जांच अधिकारी को इंडोर्स किए जाने के बाद क्या कार्रवाई हुई?

– वीरेंद्र नाथ यादव की बाइक चोरी की सूचना डायल 112 को दिए जाने के बावजूद एफआईआर क्यों नहीं दर्ज हुई?

– क्या पुलिस ने तीनों घटनाओं की जांच पूरी कर ली है?

– अगर चोरी की पुष्टि नहीं हुई तो क्या पीड़ितों को इसकी लिखित जानकारी दी गई?

– अगर जांच अभी लंबित है तो इतने समय से कार्रवाई लंबित रखने की वजह क्या है?

– क्या तीनों मामलों में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई?

– क्या उच्चाधिकारी इन मामलों का संज्ञान लेकर थाना स्तर पर हुई कार्रवाई की समीक्षा करेंगे?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पीड़ितों की ओर से चोरी की घटनाओं की तहरीर पुलिस तक पहुंची, एक मामले में जांच के लिए दरोगा को इंडोर्स किया गया और दूसरे मामले में डायल 112 को सूचना दिए जाने का भी उल्लेख है, तो आखिर मुकदमा दर्ज करने में देरी की वजह क्या है?

पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद खबर को और स्पष्ट किया जा सकता है कि इन मामलों में एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई और जांच किस स्थिति में है।

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