कोल्हुई पुलिस की नाकामी या मिलीभगत ? दिन-दहाड़े ट्यूब से बह रही तस्करी की गंगा
किसानों के हक पर डाका: सीमा पर पुलिस की सुस्ती से नेपाल जा रही भारतीय खाद

खाद की किल्लत से जूझ रहे अन्नदाता, पर सीमा पर खाकी मौन
महराजगंज। एक तरफ महराजगंज जिले का अन्नदाता खेतों में डालने के लिए एक एक बोरी खाद के वास्ते सुबह से शाम तक सोसाइटियों और दुकानों के चक्कर काट रहा है, वहीं दूसरी तरफ कोल्हुई थाना क्षेत्र की पुलिस की नाक के नीचे से भारतीय किसानों के हक का उर्वरक धड़ल्ले से नेपाल भेजा जा रहा है। ककरहवा (मेला वाला घाट) और बगही घाट के रास्तों से कंबाइन मशीन के बड़े ट्यूबों पर लादकर खाद को सीमा पार कराने का एक सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दोपहर 12 बजे के उजाले में चल रहा यह खेल पुलिस की मुस्तैदी और गश्त के दावों की धज्जियां उड़ा रहा है।भारत सरकार देश के किसानों को कर्ज और लागत के बोझ से बचाने के लिए भारी सब्सिडी पर रियायती दरों पर खाद उपलब्ध कराती है। लेकिन कोल्हुई क्षेत्र में तस्कर इस सरकारी मदद को अपनी तिजोरियां भरने का जरिया बना चुके हैं। स्थानीय किसानों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब वे अपनी ही फसलों के लिए खाद खरीदने जाते हैं, तो उन्हें लाइनों में लगना पड़ता है और किल्लत का सामना करना पड़ता है। वहीं, सीमा पर तस्कर बेखौफ होकर खुलेआम नेपाल में ऊंचे दामों पर खाद की खेप खपा रहे हैं।
सवालों के घेरे में खाकी: क्यों बंद हैं जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें ?
इस पूरे मामले में कोल्हुई पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिन के उजाले में नदी के घाटों से इतनी बड़ी मात्रा में उर्वरक पार हो जाता है और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगती, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। क्षेत्र के किसानों का साफ आरोप है कि बिना स्थानीय पुलिस की कथित सुस्ती या शह के इतना बड़ा संगठित नेटवर्क सीमा पर काम नहीं कर सकता। इस खबर और वीडियो के सामने आने के बाद महकमे में खलबली तो मची है, लेकिन किसान अब केवल कागजी जांच नहीं, बल्कि भ्रष्ट तंत्र और तस्करों के गठजोड़ पर सीधी और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि उनके हक का उर्वरक चोरी होने से बच सके।




