महराजगंज: कोल्हुई थाने में शिकायतों की अनदेखी का आरोप! दो पूर्व थानाध्यक्षों के कार्यकाल पर उठे सवाल, अब नए थानेदार से जनता को आस

महराजगंज : थाने का दरवाजा न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले फरियादियों के लिए होता है, लेकिन अगर चोरी की शिकायतों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए पीड़ितों को अधिकारियों के दफ्तरों से लेकर थाना समाधान दिवस तक चक्कर लगाने पड़ें, तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जनपद के कोल्हुई थाने में पूर्व में तैनात रहे दो
थानाध्यक्षों—कुंवर गौरव सिंह और आलोक कुमार सिंह—के कार्यकाल को लेकर स्थानीय शिकायतकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप हैं कि कई चोरी के मामलों में मुकदमा दर्ज करने में देरी हुई और कुछ घटनाओं का खुलासा लंबे समय तक नहीं हो सका।
भैंस चोरी से लेकर मोबाइल और बाइक चोरी तक, कार्रवाई पर सवाल
पूर्व थानाध्यक्ष कुंवर गौरव सिंह के कार्यकाल को लेकर शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भैंस चोरी के मामले में चोरी का मुकदमा दर्ज करने के बजाय गुमशुदगी दर्ज की गई। बाइक चोरी के मामलों में भी पीड़ितों को कार्रवाई के लिए परेशान होना पड़ा। वहीं, मोबाइल चोरी की कुछ घटनाओं में मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने और एक कथित संदिग्ध को थाने लाने के बाद छोड़ दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ मामलों में सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि शिकायतों के समर्थन में साक्ष्य मौजूद थे, तो उन पर नियमानुसार कार्रवाई कितनी तेजी से की गई? हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पूर्व थानाध्यक्ष का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
आलोक कुमार सिंह के कार्यकाल में भी नहीं मिली राहत ?
कुंवर गौरव सिंह के बाद थाने की कमान संभालने वाले आलोक कुमार सिंह से लोगों को उम्मीद थी कि पुराने मामलों की समीक्षा होगी, लंबित मुकदमे दर्ज किए जाएंगे और चोरी की घटनाओं का खुलासा होगा। लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उनके कार्यकाल में भी कई मामलों को लेकर असंतोष बना रहा।
एक बाइक चोरी के मामले में मुकदमा दर्ज कराने के लिए पीड़ित को कथित तौर पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय महराजगंज, नौतनवा तहसील दिवस और कोल्हुई थाना समाधान दिवस तक के चक्कर लगाने पड़े। शिकायतकर्ता का कहना है कि अंततः यूपी कॉप (UPCOP) के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने के बाद मुकदमा दर्ज हुआ।
यह स्थिति पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि पीड़ित को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए बार-बार अधिकारियों के सामने गुहार लगानी पड़े, तो थाने पर शिकायत सुनने और उसका समयबद्ध निस्तारण करने की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सोलर पैनल चोरी और लालपुर की घटना पर भी सवाल
स्थानीय शिकायतों के अनुसार, एक अन्य बाइक चोरी के मामले में अब तक मुकदमा दर्ज नहीं होने का आरोप है। सोलर पैनल चोरी के मामले में भी कार्रवाई लंबित होने की बात कही जा रही है। इसके अतिरिक्त लालपुर में हुई चोरी का कई महीने बीतने के बाद भी खुलासा नहीं होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अब अहम सवाल यह है कि इन मामलों में वास्तव में कितनी प्रगति हुई? किन शिकायतों पर मुकदमे दर्ज हुए, किन मामलों की जांच लंबित है और चोरी की घटनाओं में बरामदगी या गिरफ्तारी को लेकर पुलिस के पास क्या जानकारी है? इन सवालों का जवाब आधिकारिक रिकॉर्ड और पुलिस के पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा।
दो मामलों की जांच, क्या तय होगी जवाबदेही ?
बताया जा रहा है कि दो मामलों की जांच क्षेत्राधिकारी स्तर से की जा रही है। ऐसे में जांच की निष्पक्षता और उसके निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। यदि शिकायतों में लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो तथ्यों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
सवाल केवल पुराने थानाध्यक्षों के कार्यकाल का नहीं, बल्कि उन पीड़ितों का भी है जो अपनी शिकायत पर कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आखिर लंबित शिकायतों की समीक्षा कब होगी? चोरी के मामलों में मुकदमा दर्ज करने और खुलासा करने की स्थिति क्या है? और पीड़ितों को राहत कब मिलेगी?
नेपाल सीमा से सटे महत्वपूर्ण थाने की जिम्मेदारी बड़ी
कोल्हुई थाना नेपाल सीमा के नजदीक स्थित है। ऐसे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, चोरी और अन्य अपराधों पर अंकुश लगाना तथा तस्करी की गतिविधियों पर निगरानी रखना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस क्षेत्र में शिकायतों की अनदेखी का आरोप भी गंभीरता से जांचे जाने की जरूरत है, ताकि आम जनता का भरोसा बना रहे।
नए थानाध्यक्ष अभय नारायण सिंह के सामने बड़ी चुनौती
अब कोल्हुई थाने की जिम्मेदारी अभय नारायण सिंह के हाथों में है। स्थानीय लोगों को उनसे उम्मीद है कि वे पुराने लंबित मामलों की समीक्षा कराएंगे, शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे और चोरी की घटनाओं के खुलासे को प्राथमिकता देंगे।
सबसे बड़ा सवाल: क्या नए थानाध्यक्ष पुराने मामलों की फाइलों से धूल हटाकर पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे, या शिकायतकर्ता आगे भी कार्रवाई के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर रहेंगे ?
कोल्हुई की जनता अब आश्वासन नहीं, बल्कि शिकायतों पर कार्रवाई, लंबित मामलों की स्थिति और अपराध नियंत्रण के ठोस नतीजे देखना चाहती है। आने वाले दिनों में नए थानाध्यक्ष की कार्यशैली ही बताएगी कि जनता की इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरा जाता है।
महत्वपूर्ण: यह खबर स्थानीय शिकायतों और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित पूर्व थानाध्यक्षों, क्षेत्राधिकारी और पुलिस अधीक्षक महराजगंज का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।




