महराजगंज: क्या कोल्हुई पुलिस के रवैये पर उठ रहे सवाल? मारपीट के बाद कई थानों की फोर्स और सीओ को पहुंचना पड़ा मौके पर
पिपरा परसौनी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद, आशीष गुप्ता के सिर में चोट लगने की बात; पुलिस के बयान में मारपीट का स्पष्ट जिक्र नहीं होने पर सवाल

महराजगंज। कोल्हुई थाना क्षेत्र के पिपरा परसौनी गांव में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई मारपीट और उसके बाद
सड़क जाम की घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर विवाद के बाद हालात ऐसे क्यों बने कि कोल्हुई के साथ पुरंदरपुर और बृजमनगंज थाने की पुलिस फोर्स, क्षेत्राधिकारी फरेंदा दीपशिखा वर्मा और अन्य अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा?
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवाल यह हैं कि क्या समय रहते स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला जा सकता था? क्या शुरुआती कार्रवाई में कहीं चूक हुई, जिसके कारण मामला सड़क जाम तक पहुंच गया? हालांकि, पुलिस की लापरवाही की पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती।
सिर फटने की बात और पुलिस के बयान में मामूली चोट का जिक्र
घटना में आशीष गुप्ता के सिर में चोट लगने की बात सामने आई। स्थानीय पक्ष की ओर से सिर फटने की बात कही जा रही है, जबकि पुलिस के आधिकारिक बयान में चोट को मामूली बताया गया है। पुलिस के बयान में कहासुनी के बाद विवाद और मामूली चोट का उल्लेख है, लेकिन मारपीट की घटना का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि चोट की वास्तविक स्थिति क्या थी? क्या घायल का मेडिकल परीक्षण कराया गया और उसकी रिपोर्ट में क्या सामने आया? घटना की निष्पक्ष जांच के साथ इन बिंदुओं पर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
थानाध्यक्ष से संपर्क की कोशिश, नहीं मिला जवाब
इस मामले में थाना अध्यक्ष का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। ऐसे में उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। संबंधित अधिकारी का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि थाने में लंबे समय से तैनात कुछ दरोगाओं और पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा क्यों नहीं की जाती। हालांकि, किसी पुलिसकर्मी की भूमिका पर निष्कर्ष निकालने के लिए तथ्य और साक्ष्य जरूरी हैं।
उठ रहे हैं ये अहम सवाल
– दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद बढ़कर सड़क जाम तक कैसे पहुंचा?
– क्या शुरुआती स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की गई थी?
– आशीष गुप्ता की चोट को पुलिस ने मामूली बताया, तो मेडिकल रिपोर्ट में क्या सामने आया?
– पुलिस के बयान में मारपीट का स्पष्ट विवरण क्यों नहीं है?
– थाना अध्यक्ष का पक्ष जानने के लिए संपर्क किए जाने पर जवाब क्यों नहीं मिल सका?
– क्या लंबे समय से तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका और कार्यप्रणाली की समीक्षा होगी?
अब सवाल केवल मुकदमा दर्ज होने का नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने का भी है।
पुलिस प्रशासन को तथ्यों के आधार पर स्पष्ट करना चाहिए कि विवाद किन परिस्थितियों में बढ़ा, कार्रवाई कब शुरू हुई और आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं।




