महाराजगंज: कोल्हुई में खाद की कथित तस्करी पर सवाल, दिनदहाड़े दो बाइकों से ले जाई गईं उर्वरक की बोरियां
सोनारी गली से नेपाल तक खाद पहुंचाने के आरोप, SSB की छापेमारी में 9 बोरी यूरिया और 3 बोरी डीएपी मिलने की चर्चा; कार्रवाई के बावजूद तस्करी पर रोक कब ?

महाराजगंज। कोल्हुई थाना क्षेत्र में उर्वरकों की कथित तस्करी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। पुलिस की ओर से पूर्व में कई बार उर्वरक बरामद कर आरोपियों को कस्टम के सुपुर्द करने और कुछ मामलों में खाद को लावारिस में दाखिल करने की कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद कथित तस्करी पर प्रभावी रोक लगने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर सोनारी गली के रास्ते उर्वरकों को सीमावर्ती गांवों तक पहुंचाने और वहां से नेपाल भेजने के आरोप लग रहे हैं। इसी बीच आज दोपहर करीब 2 बजे के बाद सोनारी गली से दो बाइकों पर दो-दो बोरी उर्वरक ले जाते लोग दिखाई दिए। इस घटनाक्रम ने खाद की बिक्री, उसके परिवहन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, बोरियों को कहां ले जाया जा रहा था और उनका उद्देश्य क्या था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दुकानों से खाद की बिक्री पर भी सवाल
आरोप है कि क्षेत्र की कुछ दुकानों से बिना आधार कार्ड के उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। यह भी दावा किया जा रहा है कि कभी-कभी एक ही व्यक्ति के नाम पर रसीद काटकर दिनभर खाद दी जाती है। इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित दुकानों के बिक्री रिकॉर्ड की जांच होना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खाद की बिक्री निर्धारित नियमों के अनुसार हो रही है या नहीं।
SSB की छापेमारी में खाद बरामद होने की चर्चा
इसी बीच आज SSB की छापेमारी के दौरान कई बोरी यूरिया और डीएपी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, 9 बोरी यूरिया और 3 बोरी डीएपी SSB के जवान अपने वाहन से कैंप की ओर ले गए। हालांकि, बरामद खाद की मात्रा, स्थान और आगे की कार्रवाई को लेकर SSB की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है।
दिन में सीमावर्ती गांवों तक पहुंचाने, रात में नेपाल भेजने का आरोप
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि खाद को दिन के समय कोल्हुई थाना क्षेत्र की दुकानों से खरीदकर सीमावर्ती गांवों में जमा किया जाता है और रात होने पर नेपाल भेज दिया जाता है। पूर्व में हुई बरामदगी की घटनाओं के बीच इस कथित नेटवर्क की जांच और खाद की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाने की मांग उठ रही है।
आखिर कब रुकेगी कथित तस्करी ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि खाद की खरीदारी क्षेत्र की दुकानों से हो रही है और उसे सीमावर्ती गांवों तक पहुंचाया जा रहा है, तो संबंधित विभाग इसकी निगरानी कैसे कर रहा है? क्या उर्वरक विक्रेताओं के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री की रसीदों और वितरण रिकॉर्ड की नियमित जांच होती है? पुलिस और संबंधित विभाग की पूर्व कार्रवाइयों के बावजूद ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, तो इनके पीछे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
फिलहाल, सोनारी गली से दो बाइकों पर खाद ले जाते दिखने की घटना और SSB की छापेमारी में खाद बरामद होने की चर्चा ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब निगाहें पुलिस, SSB और कृषि विभाग की कार्रवाई पर हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि खाद का परिवहन वैध था या इसके पीछे तस्करी का कोई नेटवर्क सक्रिय है।
रहस्य न्यूज का सवाल: क्या जिम्मेदार विभाग खाद की बिक्री से लेकर सीमावर्ती गांवों तक उसके परिवहन की जांच कर कथित तस्करी पर प्रभावी रोक लगा पाएंगे?




