देवदह के टीले पर गूंजा ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’, 33 लोगों ने ग्रहण की बौद्ध दीक्षा
तीन दिवसीय बौद्ध सम्मेलन का शुभारंभ, 16 अक्टूबर को लगेगा भव्य मेला

भंते अमित प्रिय बोले—मानवता, त्याग और करुणा का संदेश देता है बौद्ध धर्म
फोटो कैप्शन: देवदह में बौद्ध सम्मेलन के पहले दिन प्रवज्जा कार्यक्रम में शामिल बौद्ध भिक्षु एवं अन्य लोग।
लक्ष्मीपुर (महराजगंज)। भगवान गौतम बुद्ध का ननिहाल माने जाने वाले बनरसिहा कला स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल देवदह का ऐतिहासिक टीला बुधवार को ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ के उद्घोष से गूंज उठा। यहां तीन दिवसीय बौद्ध सम्मेलन एवं प्रवज्जा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन के पहले दिन भंते अमित प्रिय ने 33 लोगों को बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलाई। इस दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का माहौल रहा।
कपिलवस्तु से आए भंते अमित प्रिय ने दीक्षा ग्रहण करने वालों को त्रिशरण, पंचशील और आर्य अष्टांगिक मार्ग के सिद्धांतों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म मानवता, त्याग, करुणा, शांति और समानता का संदेश देता है। भगवान बुद्ध ने लोगों को अंधविश्वास और आडंबर से दूर रहकर तर्क, विवेक और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि वह उस धरती पर रहता है, जहां से भगवान बुद्ध ने पूरी दुनिया को शांति और मानवता का संदेश दिया। बौद्ध धर्म में नैतिक आचरण, आत्मचिंतन और सभी प्राणियों के प्रति करुणा को विशेष महत्व दिया गया है। बुद्ध के विचार आज भी समाज में व्याप्त भेदभाव, हिंसा और अशांति को दूर करने में प्रासंगिक हैं।
भंते अमित प्रिय ने दीक्षा ग्रहण करने वालों से बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
देवदह के विकास से बढ़ेगी क्षेत्र की पहचान
कार्यक्रम में सुरेशचंद सहानी ने देवदह के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्राचीन बौद्ध स्थल का समुचित विकास होने से महराजगंज जनपद के साथ पूरे प्रदेश को लाभ मिलेगा। देवदह को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से इसकी पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो सकती है।
उन्होंने कहा कि स्थल के संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। देवदह की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करना समय की आवश्यकता है, ताकि देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों को यहां आकर्षित किया जा सके।
16 अक्टूबर को आयोजित होगा भव्य बौद्ध मेला
देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम आयोजक जितेंद्र राव ने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन 14 से 16 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को भगवान बुद्ध के विचारों, बौद्ध संस्कृति और धम्म के सिद्धांतों से परिचित कराना है।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार, 16 अक्टूबर को देवदह में भव्य बौद्ध मेला एवं महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इसमें दूर-दराज से श्रद्धालुओं और बौद्ध अनुयायियों के पहुंचने की उम्मीद है।
सम्मेलन में धम्मापाल, चंद्रपाल, उत्तमानंद, विद्यासागर, सारिपुत्र, जीवत, सुमनकृति और नंदरत्न सहित विभिन्न स्थानों से आए बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। तीन दिवसीय आयोजन में प्रवज्जा प्रशिक्षण, बौद्ध धर्म के सिद्धांतों की जानकारी और धम्म से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर जितेंद्र राव, महेंद्र जायसवाल, लक्ष्मीचंद्र पटेल, रोहित गौतम, लामलगन गौतम, जयराम कोरी, रामप्रकाश कोरी, संतराम, बेलाश और अखिलेश सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
इन 33 लोगों ने ग्रहण की प्रवज्जा
भंते अमित प्रिय के निर्देशन में प्रवज्जा ग्रहण करने वालों में ई. वीपी भारती, घिसियवन, गौरीशंकर, मोलई, राजेंद्र, सुशील, रत्नाकर, अमित, सदानंद, सत्यम, सत्यदीप, मुन्नीराम, संतराम, बनारसी, राममिलन, हरीबल, साधुशरण, रामप्रीत, गुलशन, भागीरथी, चंद्रिका, अंश, समीर, रामनरायन, रामजीत, अजित, संदीप, गनेश, अनिकेत, रामधारी, अजय, राजकुमार और श्यामा प्रसाद शामिल हैं।
देवदह में आयोजित इस सम्मेलन ने भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही इस ऐतिहासिक बौद्ध स्थल के संरक्षण और विकास की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।




