बौद्ध धर्म ध्यान, ज्ञान और दया का मार्ग : भंते अमित प्रिय
देवदह बौद्ध सम्मेलन के दूसरे दिन प्राचीन स्तूप की परिक्रमा कर भिक्षुओं ने की पूजा-अर्चना, विश्व शांति की कामना

लक्ष्मीपुर, महराजगंज। भगवान गौतम बुद्ध के ननिहाल के रूप में प्रसिद्ध देवदह में आयोजित बौद्ध सम्मेलन के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिकता का माहौल देखने को मिला। नौतनवा तहसील क्षेत्र के बनरसिहा कला स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल पर देश-दुनिया से आए बौद्ध भिक्षुओं और धर्मावलंबियों ने प्राचीन स्तूप की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ के सामूहिक उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। भिक्षुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण और सभी प्राणियों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
सम्मेलन में कपिलवस्तु से आए भंते अमित प्रिय ने कहा कि बौद्ध धर्म ध्यान, ज्ञान और दया का मार्ग है। भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षाएं आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं। वर्तमान समय में समाज को करुणा, मैत्री, अहिंसा और विश्व बंधुत्व के सिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता है। बुद्ध ने मानवता को प्रेम, सद्भाव और शांति का संदेश दिया। इन शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर समाज की अनेक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
पंचशील के सिद्धांतों से सुखमय बनेगा जीवन
बौद्ध सम्मेलन की शुरुआत तथागत गौतम बुद्ध की वंदना, त्रिशरण और पंचशील के संकल्प के साथ हुई। इसके बाद भिक्षुओं ने प्राचीन स्तूप की परिक्रमा कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
भंते उत्तमानन्द ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्ध धर्म में अहिंसा, परोपकार और प्रत्येक प्राणी के प्रति करुणा को विशेष महत्व दिया गया है। बौद्ध धर्म की शिक्षाएं पूरी दुनिया को शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश देती हैं।
भंते अमित प्रिय ने पंचशील के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंसा से दूर रहना, चोरी न करना, दुराचार से बचना, असत्य न बोलना और मादक पदार्थों से विरत रहना व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाता है। इन सिद्धांतों का पालन करने से चरित्र मजबूत होता है तथा समाज में नैतिकता, विश्वास और आपसी सहयोग की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का सर्वांगीण विकास केवल आर्थिक प्रगति से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक सद्भाव, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का होना भी आवश्यक है। बौद्ध धर्म की शिक्षाएं ऐसे समाज के निर्माण का मार्ग दिखाती हैं, जहां प्रत्येक व्यक्ति शांति और सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर सके।
देवदह के विकास से बढ़ेगी पर्यटन की संभावनाएं
सम्मेलन में भगवान गौतम बुद्ध के ननिहाल माने जाने वाले देवदह के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर भी चर्चा हुई। भंते अमित प्रिय ने कहा कि देवदह के संरक्षण और समुचित विकास की आवश्यकता है। यह स्थल बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। इसके विकास से न केवल महराजगंज, बल्कि पूरे प्रदेश को पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के क्षेत्र में लाभ मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि देवदह जैसे ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने से देश-विदेश के बौद्ध श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ सकता है। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक विकास की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
सम्मेलन में उपस्थित बौद्ध भिक्षुओं और धर्मावलंबियों ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने तथा देवदह को व्यापक पहचान दिलाने पर जोर दिया।
ये लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम का संचालन देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने किया। इस अवसर पर भंते अमित प्रिय, भंते उत्तमानन्द, जितेंद्र राव, महेंद्र जायसवाल, लक्ष्मीचन्द्र पटेल, हरिश्चंद्र चौधरी, रोहित गौतम, संतराम, अखिलेश कुमार, राममिलन, जयराम कोरी, प्रह्लाद सहित बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन: देवदह के प्राचीन बौद्ध स्तूप की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना करते बौद्ध भिक्षु एवं सम्मेलन में शामिल धर्मावलंबी।




