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दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध की जरूरत: सुग्रीव राम

तीन दिवसीय देवदह बौद्ध सम्मेलन का समापन, बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश को अपनाने का आह्वान

देवदह के विकास से विश्व पटल पर चमकेगा महराजगंज का नाम, पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

लक्ष्मीपुर, महराजगंज। नौतनवा तहसील क्षेत्र के लक्ष्मीपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बनरसिहा कला स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल देवदह में आयोजित तीन दिवसीय बौद्ध सम्मेलन का शुक्रवार को समापन हो गया। 14 से 16 अक्टूबर तक चले सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए बौद्ध भिक्षुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बौद्ध धर्मावलंबियों ने भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षाओं, मानवता, अहिंसा, करुणा और सामाजिक समानता पर विचार व्यक्त किए।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि पूर्व अधीक्षण अभियंता सुग्रीव राम ने कहा कि आज दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि बुद्ध की जरूरत है। तथागत गौतम बुद्ध ने पूरी दुनिया को शांति, प्रेम, करुणा और सद्भाव का संदेश दिया। उनके उपदेशों को जीवन में आत्मसात करके ही समाज में शांति और मानवता की स्थापना की जा सकती है। वर्तमान समय में जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हिंसा और संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं, ऐसे में बुद्ध के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

उन्होंने देवदह के विकास पर जोर देते हुए कहा कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस प्राचीन बौद्ध स्थल के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों से आने वाले समय में इसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो सकती है। इससे महराजगंज जनपद को वैश्विक पहचान मिलने के साथ पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

देवदह के विकास से रुकेगा युवाओं का पलायन

गोरख प्रसाद सिद्धार्थ ने कहा कि देवदह में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होने से देश-विदेश से पर्यटकों का आगमन बढ़ सकता है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और उन्हें अपने क्षेत्र में ही आजीविका के साधन उपलब्ध हो सकेंगे। पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से युवाओं के पलायन को रोकने में भी मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि देवदह का विकास किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे सभी धर्मों, वर्गों और समुदायों के लोगों को सामाजिक एवं आर्थिक लाभ मिल सकता है। इसलिए इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और विकास के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

बुद्ध के विचारों में निहित है वैज्ञानिक दृष्टिकोण

डॉ. विजय लक्ष्मी मल्ल ने कहा कि बौद्ध धर्म भारत से निकलकर विश्व के अनेक देशों तक पहुंचा और वहां की संस्कृति एवं जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। इसके बावजूद अपने ही देश में बुद्ध के विचारों के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म तर्क, विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को महत्व देता है। समाज को बुद्ध की शिक्षाओं को अपनाकर अंधविश्वास, भेदभाव और आपसी वैमनस्य से दूर रहना चाहिए। बुद्ध के विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार सामाजिक समरसता और समानता की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

लोभ का त्याग ही दुखों से मुक्ति का मार्ग

आगरा से आए भंते अमितप्रिय ने कहा कि भगवान बुद्ध ने मानवता को करुणा, अहिंसा और आत्मचिंतन का मार्ग दिखाया। बौद्ध धर्म में हिंसा के बजाय प्रेम और करुणा को महत्व दिया गया है। मनुष्य को अपने जीवन में शांति स्थापित करने के लिए लोभ का त्याग करना चाहिए, क्योंकि लोभ अनेक दुखों और परेशानियों का कारण बनता है।

उन्होंने कहा कि बुद्ध के बताए मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। साथ ही समाज में शांति, सद्भाव और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

देवरिया के डीपी बौद्ध ने कहा कि बौद्ध धर्म तर्क और वैज्ञानिक सोच को महत्व देने के साथ जातिविहीन एवं समानता पर आधारित समाज की स्थापना का संदेश देता है। उन्होंने देवदह की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को देखते हुए इसके संरक्षण, संवर्धन और विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई।

वहीं, पूर्व सीएमओ डॉ. एनएन प्रसाद ने कहा कि देवदह बौद्ध परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके विकास से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। उन्होंने स्थल की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करते हुए विकास कार्यों को गति देने पर जोर दिया।

तीन दिनों तक गूंजा बुद्ध के संदेशों का महत्व

देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति और पूर्वांचल कोरी जागृति संस्थान, उत्तर प्रदेश के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में तीन दिनों तक बुद्ध की शिक्षाओं, अहिंसा, करुणा, मानवता और सामाजिक समानता पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बुद्ध का संदेश किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाता है।

कार्यक्रम का संचालन देवदह बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने किया।

इस अवसर पर सौरभ शाही, विजय लक्ष्मी मल्ल, रामलालित कोरी, सुनीता, जितेंद्र जायसवाल, गोरख प्रसाद सिद्धार्थ, एनबी सिंह, जीपी गौतम, डॉ. हितेश सिंह, उदित नारायण, प्रताप नारायण गौतम, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. मुरलीधर, रामबरन, शिवमंगल, शिवदयाल, शैलेश भारती, शिवदयाल वर्मा, महेंद्र जायसवाल, लक्ष्मीचंद्र पटेल, रोहित गौतम, जयराम कोरी, अंजली कोरी, संगीता भारती, संतराम, सुग्रीव और रामबेलाश सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

सम्मेलन का संदेश स्पष्ट रहा—विश्व में शांति, समाज में समानता और मानवता की स्थापना के लिए भगवान बुद्ध के विचारों को अपनाना समय की आवश्यकता है।

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